हर दुकानदार हिसाब रखता है। कोई बही में, कोई कॉपी में, कोई सिर्फ़ याद में। सवाल यह नहीं कि हिसाब रखते हैं या नहीं — सवाल यह है कि महीने के आख़िर में उस हिसाब से कोई जवाब निकलता है या नहीं। कितना बेचा? कितना बाहर उधार पड़ा है? असल में बचा कितना? ज़्यादातर दुकानों में इन तीनों का जवाब अंदाज़ा होता है।
यह गाइड उसी अंदाज़े को आँकड़े में बदलने की है। तरीक़ा कोई भी हो — बही हो या ऐप — नीचे लिखे पाँच खाते हर दुकान के हिसाब की नींव हैं।
1. बिक्री का खाता — हर बिक्री, उसी वक़्त
हिसाब की सबसे बड़ी ग़लती शाम को होती है — "बाद में लिख लेंगे।" दिन की पाँच में से एक बिक्री लिखने से छूट जाती है, और महीने के अंत में जो कमी दिखती है उसका कोई सिरा नहीं मिलता। नियम एक ही है: बिक्री गल्ले पर लिखी जाए, गल्ला बंद करते समय नहीं। तारीख़, सामान, रक़म — और यह भी कि पैसा नक़द आया, UPI से आया, या उधार रहा।
2. उधार का खाता — नाम नहीं, रक़म और तारीख़
उधार की कॉपी में अक्सर सिर्फ़ नाम और रक़म होती है। तारीख़ नहीं होती — और तारीख़ ही वह चीज़ है जो बताती है कि कौन सा उधार पुराना पड़ रहा है। हर उधार के साथ तीन चीज़ें लिखिए: कितना, कब, और किस बिल का। वसूली के तरीक़ों पर अलग से पूरा लेख है: उधार वसूलने के 7 तरीके।
3. खर्च का खाता — बिना बिल वाला पैसा
किराया, बिजली, तनख़्वाह, टेम्पो, चाय — यह पैसा बिना बिल के निकलता है, इसलिए किसी खाते में नहीं चढ़ता। और यही पैसा महीने के अंत में "पता नहीं कहाँ गया" बनता है। खर्च का अलग पन्ना रखिए, और हर खर्च उसी दिन लिखिए। मुनाफ़ा निकालने के लिए यह खाता उतना ही ज़रूरी है जितना बिक्री का — पूरा तरीक़ा यहाँ है: दुकान का असली मुनाफ़ा कैसे निकालें। खर्च को मदों में बाँटने का तरीक़ा दुकान के खर्च कहाँ जाते हैं में है।
4. गल्ले का मिलान — रोज़, दो मिनट
दिन के अंत में गल्ले में जो नक़द है, वह लिखी हुई नक़द बिक्री से मिलना चाहिए। न मिले तो उसी दिन पता चले — हफ़्ते बाद नहीं, जब याद ही न रहे कि कौन सा दिन था। रोज़ का मिलान दो मिनट का काम है; तरीक़ा यहाँ: गल्ला रोज़ कैसे मिलाएँ। और नौकर वाली दुकान में यह मिलान कैसे हो, वह नौकर और गल्ला में है।
5. स्टॉक — साल में एक बार नहीं, चलते-चलते
जो सामान बिका, वह स्टॉक से घटना चाहिए; जो आया, वह जुड़ना चाहिए। यह काम अलग से बैठकर करने का नहीं है — बिक्री और खरीद लिखते समय साथ-साथ होने का है। तब शेल्फ़ पर सोया पैसा और ख़त्म होने वाला सामान, दोनों समय रहते दिखते हैं। पूरा तरीक़ा: स्टॉक का हिसाब।
बही में रखें या फ़ोन में?
यह पाँचों खाते बही में भी रखे जा सकते हैं — दिक़्क़त सिर्फ़ यह है कि बही में हर आँकड़ा जोड़ना पड़ता है और बही की एक ही कॉपी होती है। फ़ोन में हिसाब रखने पर जोड़ अपने आप होता है और रिकॉर्ड खाते में सुरक्षित रहता है। दोनों का ईमानदार मुक़ाबला यहाँ पढ़िए: बही बनाम मोबाइल ऐप।