← सारी गाइड
हिसाब गाइड

बही बनाम मोबाइल ऐप — दुकान का हिसाब किसमें रखें?

पहले साफ़ कह दें: बही कोई पिछड़ा तरीक़ा नहीं है। पीढ़ियों से दुकानें बही पर चली हैं, और जो दुकानदार रोज़ ईमानदारी से बही लिखता है, उसका हिसाब कई ऐप वालों से बेहतर होता है। सवाल बही बनाम ऐप का नहीं — लिखे हुए के इस्तेमाल का है। (क्या-क्या लिखना ज़रूरी है, वह हिसाब की पूरी गाइड में है।)

जहाँ बही जीतती है

जहाँ बही हार जाती है

ऐप का असली फ़ायदा जोड़ में है

ऐप की ख़ूबी यह नहीं कि वह "डिजिटल" है। ख़ूबी यह है कि लिखते ही जोड़ हो जाता है — दिन का, महीने का, ग्राहक का, सामान का। जो सवाल बही से निकालने में घंटा लगता है ("इस महीने कितना बेचा? बचा कितना?"), ऐप में वह पहले से लिखा मिलता है — मुनाफ़े की गिनती इसी जोड़ पर टिका है। और रिकॉर्ड खाते में रहता है, फ़ोन में नहीं — फ़ोन टूटे तो फ़ोन जाता है, हिसाब नहीं।

डर किस बात का, और किसका जायज़ है

"ऐप में डालेंगे तो सरकार देख लेगी" — यह डर सुनने में जितना आम है, तकनीकी रूप से उतना ही ग़लत। हिसाब का ऐप आपकी निजी बही है; वह किसी सरकारी पोर्टल से जुड़ा नहीं होता। सरकार तक वही जाता है जो आप ख़ुद रिटर्न में भरते हैं — यह बात बही में हिसाब रखने पर भी उतनी ही सच है। जायज़ चिंता एक ही है: ऐप बंद हो जाए तो डेटा का क्या? इसलिए ऐसा ऐप चुनिए जिसमें अपना डेटा निकालने (export) की सुविधा हो।

फ़ैसले का आसान नियम

दिन में दस से कम बिक्री हो और उधार न के बराबर — बही काफ़ी है। उससे ज़्यादा हो, उधार चलता हो, या GST का काम हो — जोड़ का काम इतना बढ़ जाता है कि ऐप अपनी क़ीमत हफ़्ते भर में निकाल लेता है।

Billing Babu बही की तरह ही सीधा है — बिक्री लिखिए, बाक़ी जोड़-घटाव अपने आप। ₹49 महीने से, किसी मशीन के बिना, उसी फ़ोन पर जो जेब में है। डेटा कभी भी export कर सकते हैं।

हिसाब अपने आप रखा जाए तो?

Billing Babu में बिक्री, उधार, खर्च और स्टॉक एक जगह — और रोज़ शाम दिन का हिसाब व्हाट्सएप पर। 14 दिन मुफ़्त, कार्ड की ज़रूरत नहीं।

मुफ़्त में शुरू करें →